आहार, प्रयास, प्रजल्प, नियमाग्रह, जनसंग और लौल्य। इसी को सामान्य भाषा में आहार अर्थात अतिभोजन, प्रयास अर्थात आसनों के साथ जोर-जबरदस्ती, प्रजल्प अर्थात अभ्यास का दिखावा, नियामाग्रह अर्थात योग करने के कड़े नियम बनाना, जनसंग अर्थात अधिक जनसंपर्क और अंत में लौल्य का मतलब शारीरिक और मानसिक चंचलता।
Yoga is an ancient physical and spiritual discipline and originated in India reportedly more than 5,000 years ago. The word yoga comes from the Sanskrit word yuj, which means to yoke, join, or unite.
Tuesday, March 24, 2020
समाधि
यह चित्त की अवस्था है जिसमें चित्त ध्येय वस्तु के चिंतन में पूरी तरह लीन हो जाता है। योग दर्शन समाधि के द्वारा ही मोक्ष प्राप्ति को संभव मानता है।
समाधि की भी दो श्रेणियां हैं :
1.सम्प्रज्ञात और
2.असम्प्रज्ञात।
सम्प्रज्ञात समाधि वितर्क, विचार, आनंद और अस्मितानुगत होती है।
असम्प्रज्ञात में सात्विक, राजस और तामस सभी वृत्तियों का निरोध हो जाता है। इसे बौद्ध धर्म में संबोधि, जैन धर्म में केवल्य और हिन्दू धर्म में मोक्ष प्राप्त करना कहते हैं। इस सामान्य भाषा में मुक्ति कहते हैं।
पुराणों में मुक्ति के 6 प्रकार बताएं गए है जो इस प्रकार हैं-
1.साष्ट्रि, (ऐश्वर्य),
2.सालोक्य (लोक की प्राप्ति),
3.सारूप (ब्रह्मस्वरूप),
4.सामीप्य, (ब्रह्म के पास),
5.साम्य (ब्रह्म जैसी समानता)
6.लीनता या सायुज्य (ब्रह्म में लीन होकर ब्रह्म हो जाना)।
समाधि की भी दो श्रेणियां हैं :
1.सम्प्रज्ञात और
2.असम्प्रज्ञात।
सम्प्रज्ञात समाधि वितर्क, विचार, आनंद और अस्मितानुगत होती है।
असम्प्रज्ञात में सात्विक, राजस और तामस सभी वृत्तियों का निरोध हो जाता है। इसे बौद्ध धर्म में संबोधि, जैन धर्म में केवल्य और हिन्दू धर्म में मोक्ष प्राप्त करना कहते हैं। इस सामान्य भाषा में मुक्ति कहते हैं।
पुराणों में मुक्ति के 6 प्रकार बताएं गए है जो इस प्रकार हैं-
1.साष्ट्रि, (ऐश्वर्य),
2.सालोक्य (लोक की प्राप्ति),
3.सारूप (ब्रह्मस्वरूप),
4.सामीप्य, (ब्रह्म के पास),
5.साम्य (ब्रह्म जैसी समानता)
6.लीनता या सायुज्य (ब्रह्म में लीन होकर ब्रह्म हो जाना)।
Sunday, March 22, 2020
ध्यान
जब ध्येय वस्तु का चिंतन करते हुए चित्त तद्रूप हो जाता है तो उसे ध्यान कहते हैं। पूर्ण ध्यान की स्थिति में किसी अन्य वस्तु का ज्ञान अथवा उसकी स्मृति चित्त में प्रविष्ट नहीं होती।
ध्यान के रूढ़ प्रकार:-
स्थूल ध्यान, ज्योतिर्ध्यान और सूक्ष्म ध्यान।ध्यान विधियां:-
श्वास ध्यान, साक्षी भाव, नासाग्र ध्यान, विपश्यना ध्यान आदि हजारों ध्यान विधियां हैं।धारणा
चित्त को एक स्थान विशेष पर केंद्रित करना ही धारणा है।
प्रत्याहार के सधने से धारणा स्वत: ही घटित होती है।
धारणा धारण किया हुआ चित्त कैसी भी धारणा या कल्पना करता है, तो वैसे ही घटित होने लगता है।
यदि ऐसे व्यक्ति किसी एक कागज को हाथ में लेकर यह सोचे की यह जल जाए तो ऐसा हो जाता है।
प्रत्याहार के सधने से धारणा स्वत: ही घटित होती है।
धारणा धारण किया हुआ चित्त कैसी भी धारणा या कल्पना करता है, तो वैसे ही घटित होने लगता है।
यदि ऐसे व्यक्ति किसी एक कागज को हाथ में लेकर यह सोचे की यह जल जाए तो ऐसा हो जाता है।
प्रत्याहार
इंद्रियों को विषयों से हटाने का नाम ही प्रत्याहार है।
इंद्रियां मनुष्य को बाहरी विषयों में उलझाए रखती है।।
प्रत्याहार के अभ्यास से साधक अन्तर्मुखिता की स्थिति प्राप्त करता है।
जैसे एक कछुआ अपने अंगों को समेट लेता है उसी प्रकार प्रत्याहरी मनुष्य की स्थिति होती है।
यम नियम, आसान, प्राणायाम को साधने से प्रत्याहार की स्थिति घटित होने लगती है।
इंद्रियां मनुष्य को बाहरी विषयों में उलझाए रखती है।।
प्रत्याहार के अभ्यास से साधक अन्तर्मुखिता की स्थिति प्राप्त करता है।
जैसे एक कछुआ अपने अंगों को समेट लेता है उसी प्रकार प्रत्याहरी मनुष्य की स्थिति होती है।
यम नियम, आसान, प्राणायाम को साधने से प्रत्याहार की स्थिति घटित होने लगती है।
Friday, March 20, 2020
मुद्राएं और उनके प्रकार
6 आसन मुद्राएं:-
1.व्रक्त मुद्रा,2.अश्विनी मुद्रा,
3.महामुद्रा,
4.योग मुद्रा,
5.विपरीत करणी मुद्रा,
6.शोभवनी मुद्रा।
पंच राजयोग मुद्राएं-
1.चाचरी,2.खेचरी,
3.भोचरी,
4.अगोचरी,
5.उन्न्युनी मुद्रा।
*10 हस्त मुद्राएं:-
उक्त के अलावा हस्त मुद्राओं में प्रमुख दस मुद्राओं का महत्व है जो निम्न है:-1.ज्ञान मुद्रा,
2.पृथवि मुद्रा,
3.वरुण मुद्रा,
4.वायु मुद्रा,
5.शून्य मुद्रा,
6.सूर्य मुद्रा,
7.प्राण मुद्रा,
8.लिंग मुद्रा,
9.अपान मुद्रा,
10.अपान वायु मुद्रा।
अन्य मुद्राएं :
1.सुरभी मुद्रा,2.ब्रह्ममुद्रा,
3.अभयमुद्रा,
4.भूमि मुद्रा,
5.भूमि स्पर्शमुद्रा,
6.धर्मचक्रमुद्रा,
7.वज्रमुद्रा,
8.वितर्कमुद्रा,
9.जनाना मुद्रा,
10.कर्णमुद्रा,
11.शरणागतमुद्रा,
12.ध्यान मुद्रा,
13.सुची मुद्रा,
14.ओम मुद्रा,
15.जनाना और चीन मुद्रा,
16.अंगुलियां मुद्रा
17.महात्रिक मुद्रा,
18.कुबेर मुद्रा,
19.चीन मुद्रा,
20.वरद मुद्रा,
21.मकर मुद्रा,
22.शंख मुद्रा,
23.रुद्र मुद्रा,
24.पुष्पपूत मुद्रा,
25.वज्र मुद्रा,
26.श्वांस मुद्रा,
27.हास्य बुद्धा मुद्रा,
28.योग मुद्रा,
29.गणेश मुद्रा
30.डॉयनेमिक मुद्रा,
31.मातंगी मुद्रा,
32.गरुड़ मुद्रा,
33.कुंडलिनी मुद्रा,
34.शिव लिंग मुद्रा,
35.ब्रह्मा मुद्रा,
36.मुकुल मुद्रा,
37.महर्षि मुद्रा,
38.योनी मुद्रा,
39.पुशन मुद्रा,
40.कालेश्वर मुद्रा,
41.गूढ़ मुद्रा,
42.मेरुदंड मुद्रा,
43.हाकिनी मुद्रा,
44.कमल मुद्रा,
45.पाचन मुद्रा,
46.विषहरण मुद्रा या निर्विषिकरण मुद्रा,
47.आकाश मुद्रा,
48.हृदय मुद्रा,
49.जाल मुद्रा आदि।
योग क्रिया क्या है
प्रमुख 13 क्रियाएँ
1.नेती- सूत्र नेति, घॄत नेति,
2.धौति- वमन धौति, वस्त्र धौति, दण्ड धौति,
3.गजकरणी,
4.बस्ती- जल बस्ति,
5.कुंजर,
6.न्यौली,
7.त्राटक,
8.कपालभाति,
9.धौंकनी,
10.गणेश क्रिया,
11.बाधी,
12.लघु शंख प्रक्षालन और
13.शंख प्रक्षालयन।
1.नेती- सूत्र नेति, घॄत नेति,
2.धौति- वमन धौति, वस्त्र धौति, दण्ड धौति,
3.गजकरणी,
4.बस्ती- जल बस्ति,
5.कुंजर,
6.न्यौली,
7.त्राटक,
8.कपालभाति,
9.धौंकनी,
10.गणेश क्रिया,
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मत्स्यासन
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प्राणायाम के पंचक:- 1.व्यान, 2.समान, 3.अपान, 4.उदान और 5.प्राण। प्राणायाम के प्रकार:- 1.पूरक, 2.कुम्भक और 3.रेचक। इसे ही हठयोगी अभ्यां...